Mashhoor Shayaron kee Pratinidhi Shayari Daagh Dehlvi
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Mashhoor Shayaron kee Pratinidhi Shayari Daagh Dehlvi by Daagh Dehlvi
वो कत्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं ये काम किसने किया है, ये काम किसका था वफ़ा करेंगे, निबाहेंगे, बात मानेंगे तुम्हें भी याद है कुछ. ये कलाम किसका था दाग देहलवी की रचनात्मक क्षमता अपने समकालीन उर्दू शायरों से कहीं अधिक थी। इतने बड़े शायरी के शरमाये में सिर्फ उनकी मोहब्बत की बाजारियत को ही उनकी शायरी की पहचान समझना सबसे बड़ी भूल होगी। इससे इंकार करता कठिन है कि लाल किले के मृजरों, कव्वालियों, अय्याशियों, अफ्रीम. शराब की रंगरलियों से जिनकी ऊपरी चमक-दमक में उस समय की दम तोड़ती तहजीब की अंतिम हिचकियाँ साफ़ सुनाई देती थीं, दान अपने बचपन और जवानी के शुरुआती वर्षों में प्रभावित हुए थे। इस दौर का सांस्कृतिक पतन उनके शुरू के इश्क के रवैये में साफ़ नज़र आता है। उनकी गजल की नायिका भी इस असर के तहत बाज़ार का खिलौना थी, जिससे वो भी उन दिनों की परम्परा के अनुसार खुब खेले । लेकिन दाग देहलवी का कमाल यह है कि वह यहीं तक सीमित होकर नहीं रहे थे। उनकी शायरी में उनके व्यक्तित्व की भाँति, जिसमें आशिक नजाराबाज़, सूफी फनकार, दुनियादार, अतीत, वर्तमान एक साथ जीते-जागते हैं, कई दिशाओं का सफरनामा है। ये शायरी जिन्दा आदमी के विरोधाभासों का बहुमुखी रूप है, जिसे किसी एक चेहरे से पहचान पाना मुश्किल है। - इसी किताब से| SKU | Unavailable |
| ISBN 13 | 9789395565042 |
| ISBN 10 | 9395565047 |
| Title | Mashhoor Shayaron kee Pratinidhi Shayari Daagh Dehlvi |
| Author | Daagh Dehlvi |
| Condition | Unavailable |
| Binding Type | Paperback |
| Publisher | Prabhakar Prakashan Private Limited |
| Year published | 2022-10-07 |
| Number of pages | 114 |
| Cover note | Book picture is for illustrative purposes only, actual binding, cover or edition may vary. |
| Note | Unavailable |